दक्षिण पूर्व रेलवे का ऐतिहासिक कदम, वन्यजीव संरक्षण और तकनीक के संगम की नई मिसाल
चक्रधरपुर (झारखंड)। दक्षिण पूर्व रेलवे का चक्रधरपुर रेल मंडल एक ऐतिहासिक पहल के तहत हाथियों को ट्रेन दुर्घटनाओं से बचाने के लिए अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित इंट्रूशन डिटेक्शन सिस्टम स्थापित कर रहा है। इस तकनीकी परियोजना पर रेलवे करीब 15 करोड़ रुपये खर्च कर रही है और इसे हाथियों की लगातार हो रही मौतों को रोकने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

यह स्मार्ट इंट्रूशन डिटेक्शन सिस्टम प्रेशर-वेव सेंसर, ऑप्टिकल फाइबर केबल, और एआई एल्गोरिद्म के संयोजन से कार्य करता है। इसकी मदद से ट्रेन पटरियों के आसपास हाथियों की गतिविधियों को करीब 200 मीटर की दूरी से पहले ही पहचान लिया जाता है। जैसे ही हाथियों की उपस्थिति दर्ज होती है, यह सिस्टम त्वरित रूप से नजदीकी स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजता है। इससे लोको पायलटों को समय पर सूचना मिलती है और ट्रेन की गति धीमी कर दी जाती है, जिससे हादसे टल सकते हैं।
इस तकनीक की कार्यक्षमता की जांच के लिए रेल मंडल ने एक अनूठा प्रयोग किया है। गुजरात के जामनगर स्थित उद्योगपति मुकेश अंबानी के वन्यजीव संरक्षण केंद्र “वनतारा” से एक प्रशिक्षित हाथी मंगवाया गया है। छह दिनों के विशेष सड़क यात्रा के बाद यह हाथी चक्रधरपुर पहुंचा है। यह दो दिनों तक रेल पटरियों के पास चलेगा, जिससे इंट्रूशन डिटेक्शन सिस्टम का डेटा तैयार होगा और एआई मॉडल को ट्रेन किया जाएगा। इससे भविष्य में प्रणाली की सटीकता और अधिक मजबूत होगी।
चक्रधरपुर रेल मंडल के जिन रेल खंडों पर यह तकनीक लगाई जा रही है, उनमें मानीकुई-चांडिल, धुतरा-बागडीह, कुनकी-चांडिल, और जराईकेला-महादेवशाल शामिल हैं। ये सभी इलाके घने जंगलों से होकर गुजरते हैं और झारखंड, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र हैं। यहां के सारंडा, पोड़ाहाट, कोल्हान और दलमा के जंगल हाथियों की आबादी के लिए प्रसिद्ध हैं। लंबे समय से इन क्षेत्रों में ट्रेन से टकराकर हाथियों की मौत की घटनाएं वन विभाग और पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का विषय रही हैं।
वन विभाग भी कई बार रेलवे को इस बारे में अलर्ट कर चुका है। अब चक्रधरपुर मंडल का यह तकनीकी नवाचार वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है। इस प्रणाली की सफलता से न केवल हाथियों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि रेलवे संचालन भी अधिक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल हो सकेगा।
यह परियोजना रेलवे की उस सोच को दर्शाती है जिसमें आधुनिक तकनीक का उपयोग सिर्फ परिचालन सुविधा तक सीमित नहीं, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण के संरक्षण में भी किया जा रहा है। चक्रधरपुर रेल मंडल इस दिशा में अग्रणी बनकर एक उदाहरण पेश कर रहा है, जो आने वाले समय में अन्य रेल मंडलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
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